विद्युत विभाग मैं भ्रष्टाचार चरम सीमा पर


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सहारनपुर 4 जनवरी वैसे तो समस्त उत्तर प्रदेश का विधुत विभाग भ्रष्टाचार में लिप है जहां से आए दिन विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के शोषण की शिकायतें मिलती ही रहती हैं कहीं चेकिंग के नाम पर मीटर रीडिंग के नाम पर तो कहीं बिजली चोरी के नाम पर और फिर सिलसिला शुरु होता है सेटिंग गेटिंग का जिसमें उपभोक्ता द्वारा यदि मौके पर विभाग के अधिकारियों को उनके मन मुताबिक सुविधा शुल्क अदा कर दिया तब सब ठीक-ठाक है। यदि नहीं दिया तब समझो उपभोक्ता की तो शामत ही आ गई उसे मांगे गए सुविधा शुल्क से कई गुना ज्यादा तक अदा करना पड़ सकता है। जिसका कारण बनती है उपभोक्ता के विरुद्ध जेई/एसडीओ द्वारा दर्ज कराई जा रही झूठी चोरी की एफ,आई,आर, ऐसे में उपभोक्ता लाचार और बेबस होकर रह जाता है उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं होता और बेचारा उपभोक्ता पुलिस और विद्युत विभाग के बीच उलझ कर रह जाता है। जनपद सहारनपुर में आजकल यह नजारे आम हैं। सहारनपुर बिजली विभाग के जेई /खंड अधिकारी जिनकी अपने उच्च अधिकारियों एक्शन, एससी के साथ सांठगांठ है व उनके स्टाफ के भ्रष्टतंत्र की कार्यशैली सभी भ्रष्टाचारियों को मात देती दिखाई पढ़ती है। यह अपने साथ विजिलेंस दल के पांच छः कर्मचारियों और अपने विभाग के आठ दस लोगों जिस में प्राइवेट लोग भी होते हैं इन्हें लेकर क्षेत्रों में तथाकथित छापामारी के लिए निकल पड़ते हैं। फिर शुरू होता है उपभोक्ता का उत्पीड़न इतनी बड़ी तादाद में अधिकारियों और प्रवर्तन दल के कर्मचारियों को जो पुलिस की वर्दी में होते हैं देखकर उपभोक्ता डर और सहम जाता है। अब जिस पर चाहें जैसे चाहें यह लोग दबाव बनालेते है। साथ ही मौक़े पर निस्तारण की बात करते हैं। जो भोक्ता इनकी बात मान कर मौके पर ही इनको सुविधा शुल्क दे देता है उसकी जान बच जाती है जो उपभोक्ता इनके के दबाव में नहीं आता या उसकी कोई मजबूरी होती है तो उसकी f.i.r. करा कर उसका मामला उच्च अधिकारियों के हवाले कर देते हैं जहां पहले से इनकी सांठगांठ और इन्हें संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में उपभोक्ता को अपना अच्छा खासा समय बर्बाद करने के पश्चात भी मौक़े पर ना दिए गए सुविधा शुल्क से दस गुना तक भरना पड़ जाता है।
वह भी पहले से कहीं ज्यादा सुविधा शुल्क के साथ क्योंकि आख़िर कलम की ताकत तो इन अधिकारियों के हाथों में ही है जिसे अधिकारी अच्छी तरह जानते हैं और इसी का नाजायज फायदा उठाते हैं। उपभोक्ता मरे या जिए इन्हें उससे क्या?

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